भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय राजनीति के सबसे सम्मानित नेताओं में शामिल Atal Bihari Vajpayee की जयंती आज पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जा रही है। राजनीति में शालीनता, संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों की मिसाल माने जाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी को देश एक ऐसे नेता के रूप में याद कर रहा है, जिनका व्यक्तित्व सत्ता से कहीं ऊपर था।
अटल बिहारी वाजपेयी न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक नेताओं में शामिल थे, बल्कि वे ऐसे राजनेता रहे जिन्हें विपक्ष भी उतनी ही गंभीरता से सुनता था, जितनी सत्ता पक्ष।
राजनीति में अलग पहचान बनाने वाले नेता
अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीति की सबसे बड़ी विशेषता थी — विचारधारा में स्पष्टता और व्यवहार में संतुलन। वे अपने राजनीतिक विरोधियों के प्रति भी सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करते थे। यही कारण है कि उन्हें भारतीय राजनीति का ‘अजातशत्रु’ कहा गया।
संसद में उनके भाषण आज भी राजनीतिक शिष्टाचार और लोकतांत्रिक संवाद का उदाहरण माने जाते हैं।
प्रधानमंत्री के रूप में ऐतिहासिक फैसले
प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी का कार्यकाल भारत के लिए कई मायनों में निर्णायक साबित हुआ। उनके नेतृत्व में देश ने कई बड़े और साहसिक फैसले लिए, जिनका असर लंबे समय तक दिखाई दिया।
प्रमुख उपलब्धियां:
- पोखरण परमाणु परीक्षण के जरिए भारत को सामरिक मजबूती
- गोल्डन क्वाड्रिलेटरल परियोजना से सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
- पड़ोसी देशों से संवाद की पहल, विशेषकर पाकिस्तान के साथ बस कूटनीति
- आर्थिक सुधारों को नई दिशा
- लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूती
विशेषज्ञों के अनुसार, अटल बिहारी वाजपेयी ने यह साबित किया कि मजबूत राष्ट्रहित और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ शासन संभव है।
कवि और संवेदनशील नेता की छवि
अटल बिहारी वाजपेयी की पहचान केवल एक राजनेता तक सीमित नहीं थी। वे एक प्रसिद्ध कवि भी थे और उनकी कविताओं में राष्ट्र, समाज और मानव संवेदना की गहरी झलक मिलती है। यही संवेदनशीलता उनके राजनीतिक फैसलों में भी दिखाई देती थी।
उनका मानना था कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि सेवा और संवाद का माध्यम होनी चाहिए।
आज भी प्रासंगिक हैं अटल जी के विचार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा दौर में, जब राजनीति में ध्रुवीकरण और तीखी बयानबाज़ी आम हो गई है, तब अटल बिहारी वाजपेयी के विचार और कार्यशैली पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।
उनका यह कथन आज भी चर्चा में रहता है कि
“लोकतंत्र में असहमति दुश्मनी नहीं होती।”
देशभर में जयंती पर कार्यक्रम
अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। राजधानी दिल्ली से लेकर राज्यों तक स्मरण कार्यक्रम और विचार गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है।
निष्कर्ष
अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में रहे, जिन्होंने सत्ता में रहते हुए भी मर्यादा, संयम और संवाद को प्राथमिकता दी। उनकी जयंती न केवल स्मरण का अवसर है, बल्कि यह याद दिलाने का भी समय है कि राजनीति में शालीनता और राष्ट्रहित सर्वोपरि होने चाहिए।