Hyderabad में विदेशी ड्रग नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई

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Javed Haider Zaidi

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Hyderabad police escorting a foreign national woman during action against drug trafficking and visa violation case

वीज़ा खत्म होने के बाद भी भारत में रह रही युगांडा महिला डिपोर्ट, नारकोटिक्स कनेक्शन से मचा हड़कंप

Hyderabad: हैदराबाद में ड्रग तस्करी के खिलाफ चल रही सख्त मुहिम के तहत पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। नारकोटिक्स एन्फोर्समेंट विंग ने युगांडा की एक महिला नागरिक को हिरासत में लेकर भारत से डिपोर्ट कर दिया है। जांच में सामने आया कि महिला का वीज़ा पहले ही समाप्त हो चुका था, इसके बावजूद वह देश में अवैध रूप से रहकर ड्रग नेटवर्क से जुड़े लोगों के संपर्क में थी

वीज़ा एक्सपायरी के बाद भी भारत में मौजूद थी महिला

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित विदेशी महिला टूरिस्ट वीज़ा पर भारत आई थी, लेकिन वीज़ा की वैध अवधि समाप्त होने के बाद भी उसने देश नहीं छोड़ा। इस दौरान वह अलग-अलग शहरों में रहकर संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाई गई।

ड्रग पेडलरों से संपर्क में होने का शक

नारकोटिक्स यूनिट की निगरानी में महिला की गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी। जांच के दौरान संकेत मिले कि वह ड्रग तस्करी से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के कुछ लोगों के संपर्क में थी। हालांकि, पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच से जुड़ी कई जानकारियां फिलहाल सार्वजनिक नहीं की हैं।

FRRO की मदद से पूरी की गई डिपोर्टेशन प्रक्रिया

महिला के पास वैध दस्तावेज न मिलने के बाद FRRO (Foreigners Regional Registration Office) को सूचना दी गई। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे एग्जिट परमिट जारी किया गया और सुरक्षा व्यवस्था के बीच भारत से बाहर भेज दिया गया। साथ ही, भविष्य में भारत में दोबारा प्रवेश पर रोक लगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

पुलिस का साफ संदेश: अवैध गतिविधियों पर जीरो टॉलरेंस

हैदराबाद पुलिस ने साफ किया है कि शहर में ड्रग्स, अवैध विदेशी ठहराव और अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। पुलिस ने नागरिकों से भी अपील की है कि यदि किसी इलाके में संदिग्ध गतिविधि या अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की जानकारी मिले, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।

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क्यों अहम है यह कार्रवाई?

यह मामला सिर्फ वीज़ा उल्लंघन का नहीं, बल्कि भारत में सक्रिय ड्रग नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है। हाल के महीनों में हैदराबाद पुलिस ने ऐसे कई मामलों में सख्त रुख अपनाकर साफ कर दिया है कि कानून से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई पर सस्पेंस: बेल हियरिंग आज, चेक बाउंस केस में ₹9 करोड़ बकाया पर टिकी निगाहें

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तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव, चेक बाउंस केस में जमानत सुनवाई से पहले रिहाई को लेकर सस्पेंस।

राजपाल यादव: दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) की रिहाई को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। चेक बाउंस मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए राजपाल यादव की जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई होनी है। उनके मैनेजर गोल्डी ने उम्मीद जताई है कि अदालत से राहत मिल सकती है और वह जल्द बाहर आ सकते हैं।

राजपाल यादव का नाम लंबे समय से इस वित्तीय विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसकी जड़ें साल 2010 तक जाती हैं। यह मामला उनकी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के दौरान लिए गए कर्ज से जुड़ा है। फिल्म की असफलता के बाद कर्ज चुकाने में देरी हुई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

इंडस्ट्री का साथ, परिवार की उम्मीद

राजपाल यादव के मैनेजर गोल्डी ने हालिया बातचीत में बताया कि फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सोनू सूद, सलमान खान, अजय देवगन, डेविड धवन, रतन जैन और वरुण धवन जैसे लोग समर्थन जता चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आर्थिक सहायता किस स्तर पर दी जा रही है, लेकिन इतना जरूर कहा कि सभी ने सकारात्मक प्रतिबद्धता जताई है।

गोल्डी के मुताबिक, ऐसे वित्तीय लेन-देन में समय लगता है और परिवार मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाए हुए है। फरवरी के अंत में परिवार में कुछ निजी कार्यक्रम भी निर्धारित हैं और सभी की इच्छा है कि राजपाल यादव तब तक रिहा हो जाएं। उन्होंने यह भी बताया कि बेल हियरिंग तय है और अदालत के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

क्या है पूरा कानूनी मामला?

साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बाद वह समय पर भुगतान नहीं कर सके। इसके बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की।

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि उनके द्वारा जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए थे। अदालत ने उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई।

बढ़ती बकाया राशि और अदालत का रुख

जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए बकाया राशि चुकाने के लिए ठोस प्रयास दिखाने का निर्देश दिया था। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने से बकाया रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक राजपाल यादव ने लगभग 75 लाख रुपये जमा किए थे, लेकिन अदालत ने माना कि कुल बकाया का बड़ा हिस्सा अभी भी बाकी है। फरवरी 2025 में अदालत ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। अतिरिक्त समय मांगने की उनकी अर्जी भी खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

रिहाई कब तक?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजपाल यादव को अदालत से जमानत कब तक मिल सकती है। उनके मैनेजर ने उम्मीद जताई है कि सुनवाई के बाद सकारात्मक फैसला आ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, फिल्म इंडस्ट्री से मिल रहा समर्थन और परिवार की उम्मीदें इस कानूनी संघर्ष के बीच एक मानवीय पक्ष को सामने लाती हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला ही तय करेगा कि राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई कब संभव हो पाएगी।

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