उत्तर प्रदेश में Illegal Codeine Cough Syrup कारोबार का पर्दाफाश, ₹10 per Bottle में Crores का Fake Billing Network

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Javed Haider Zaidi

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कागज़ी कंपनियां, नकली पते और फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे तैयार हुई कोडीन सिरप की विशाल सप्लाई चेन

उत्तर प्रदेश में अवैध कोडीन युक्त खांसी सिरप के कारोबार का एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने पाया है कि इस गैरकानूनी धंधे से जुड़े लोग महज ₹10 प्रति बोतल के हिसाब से फर्जी बिल बनवाकर एक ऐसा सप्लाई नेटवर्क खड़ा कर चुके थे, जिसकी जड़ें कई जिलों और राज्यों तक फैली हुई थीं।

जांच में सामने आया है कि कई मेडिकल स्टोर और थोक विक्रेताओं के नाम पर कागज़ी फर्में बनाई गईं, जिनका न तो कोई वास्तविक कारोबार था और न ही भौतिक अस्तित्व। इन फर्जी कंपनियों के जरिए खांसी सिरप की खरीद-फरोख्त दिखाई जाती थी, जबकि असल में यह दवाएं अवैध बाजार में खपाई जा रही थीं।

अधिकारियों के अनुसार, गिरोह ने सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाते हुए मेडिकल बिलिंग को हथियार बनाया। दुकानदारों को मामूली रकम देकर सिरप की एंट्री बिलों में दिखवाई जाती थी, जिससे स्टॉक वैध नजर आए और ट्रांसपोर्ट में कोई शक न हो। कई मामलों में जिन पतों पर कंपनियां दर्ज थीं, वहां या तो बंद दुकानें मिलीं या फिर कोई और व्यवसाय चल रहा था।

इस नेटवर्क का दायरा केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि सिरप की सप्लाई अन्य राज्यों और पड़ोसी देशों तक भी की जा रही थी। पुलिस और औषधि विभाग की टीमों ने अब तक बड़ी मात्रा में अवैध खांसी सिरप जब्त की है और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इस पूरे खेल में और कौन-कौन लोग शामिल थे, कहीं इसमें प्रभावशाली नाम या संगठित आर्थिक अपराध तो नहीं जुड़े हुए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही, मेडिकल लाइसेंसिंग और दवा वितरण प्रणाली को और सख्त करने की तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह के अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

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मौलाना यासूब अब्बास का कड़ा बयान: इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में आतंकी हमला, UN से पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने की मांग

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इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में आतंकी हमले पर मौलाना यासूब अब्बास का कड़ा बयान, पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए वीडियो संदेश

मौलाना यासूब अब्बास का कड़ा बयान: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में स्थित शिया मस्जिद खदीजतुल कुबरा में शुक्रवार की नमाज़ के दौरान हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। नमाज़ अदा कर रहे मासूम नमाज़ियों को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में कई लोगों की शहादत की खबर है, जबकि कई गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

इस दर्दनाक घटना पर ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड (AISPLB) के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास (Yasoob Abbas) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस हमले को इंसानियत और इस्लाम दोनों के खिलाफ करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सख्त कदम उठाने की अपील की है।

“आतंकियों का इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं” — मौलाना यासूब अब्बास

मौलाना यासूब अब्बास ने अपने बयान में कहा कि जो लोग खुद को मुसलमान बताकर मस्जिदों में नमाज़ियों पर गोलियां बरसाते हैं, वे दरअसल इस्लाम के नाम पर छिपे हुए वहशी दरिंदे हैं। उनका कहना था कि इस्लाम किसी भी निर्दोष की हत्या की इजाज़त नहीं देता और ऐसे कृत्य करने वालों का इस्लाम से कोई संबंध नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में शिया समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद वहां की सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं चुप्पी साधे हुए हैं। यह चुप्पी आतंकवाद को और बढ़ावा दे रही है।

संयुक्त राष्ट्र से पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने की मांग

AISPLB के महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) से स्पष्ट शब्दों में मांग की कि पाकिस्तान को एक आतंकवादी देश घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की धरती से लगातार आतंकवाद पनप रहा है और वहां अल्पसंख्यकों, खासकर शिया मुसलमानों की जान सुरक्षित नहीं है।

मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय मंच अब भी सख्त कार्रवाई नहीं करता, तो ऐसे हमले भविष्य में और भयावह रूप ले सकते हैं।

शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना

अपने बयान के अंत में मौलाना यासूब अब्बास ने हमले में शहीद हुए लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह ईश्वर से दुआ करते हैं कि शहीदों के परिवारों को इस असहनीय दुख को सहने की ताकत मिले और घायलों को जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ हो।

मानवता पर हमला, पूरी दुनिया के लिए चेतावनी

इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में हुआ यह आतंकी हमला सिर्फ एक समुदाय पर नहीं, बल्कि पूरी मानवता और धार्मिक सह-अस्तित्व पर हमला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय दबाव नहीं बनाया गया, तो दक्षिण एशिया में सांप्रदायिक आतंकवाद और अधिक खतरनाक रूप ले सकता है।

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