AI का दबदबा या मुनाफावसूली? TCS-Infosys समेत IT सेक्टर से 1.3 लाख करोड़ रुपये फिसले

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Javed Haider Zaidi

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TCS, Infosys, Wipro और HCL Tech के शेयरों में भारी गिरावट, निफ्टी IT इंडेक्स 4% से ज्यादा टूटा, AI तकनीक और वैश्विक आर्थिक संकेतों से आईटी सेक्टर पर दबाव

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को आईटी सेक्टर में जोरदार गिरावट ने निवेशकों की नींद उड़ा दी। निफ्टी IT इंडेक्स में 4% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले चार महीनों का सबसे निचला स्तर है। इस एक दिन की बिकवाली में टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक जैसी प्रमुख कंपनियों का कुल मार्केट वैल्यू लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये घट गया।

देश की सबसे मूल्यवान आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का मार्केट कैप ₹10 लाख करोड़ के स्तर से नीचे फिसल गया। बीएसई पर TCS का शेयर 4.5% टूटकर ₹2,776 पर पहुंच गया, जो पिछले 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। पूरे सेक्टर में बिकवाली इतनी तीव्र रही कि निफ्टी IT इंडेक्स की कुल मार्केट कैप घटकर ₹27.6 लाख करोड़ रह गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट के पीछे ‘Anthropic शॉक’ बड़ी वजह है। अमेरिकी AI स्टार्टअप Anthropic ने नया प्रोडक्ट Claude Cowork लॉन्च किया है, जो कॉन्ट्रैक्ट रिव्यू, लीगल डॉक्यूमेंटेशन और कंप्लायंस जैसे काम खुद-ब-खुद कर सकता है। ये वही सेवाएं हैं जिनसे पारंपरिक IT कंपनियां अरबों रुपये कमाती रही हैं। अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज Jefferies ने इसे SaaSpocalypse करार दिया, यानी अब AI सहयोगी नहीं, बल्कि सख्त प्रतिस्पर्धा बन गया है।

इसके अलावा अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आए डेटा ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया। अमेरिका में हालिया जॉब्स डेटा के अनुसार पिछले महीने 1.3 लाख नई नौकरियां जुड़ीं और बेरोजगारी दर 4.3% पर बनी रही। इससे फेडरल रिजर्व की निकट भविष्य में ब्याज दर कटौती की संभावना कमजोर हुई। ग्रोथ-सेंसिटिव टेक शेयरों के लिए यह नकारात्मक संकेत है।

विश्लेषकों का मानना है कि AI पारंपरिक सॉफ्टवेयर, टेस्टिंग और BPO सेवाओं को अप्रासंगिक बना सकता है। कुछ आकलनों में यह आशंका जताई गई है कि आने वाले समय में आईटी कंपनियों के राजस्व में 40% तक की गिरावट आ सकती है। हालांकि, कुछ ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि अगले 3-6 महीनों में AI-नेटिव साझेदारियां और नए डील्स से स्थिति बदल सकती है।

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इस घटनाक्रम से साफ है कि भारतीय IT सेक्टर अब एक्जिस्टेंशियल क्राइसिस का सामना कर रहा है। निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने का है, क्योंकि AI का बढ़ता दबदबा पारंपरिक आईटी सेवाओं के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

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रूस में WhatsApp पर पूरी तरह बैन की तैयारी? सरकार की सख्ती से करोड़ों यूजर्स प्रभावित, मेटा ने दी प्रतिक्रिया

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रूस में WhatsApp पर पूरी तरह बैन, करोड़ों यूजर्स प्रभावित, मेटा और क्रेमलिन के बीच कानूनों को लेकर विवाद

रूस और अमेरिकी टेक कंपनियों के बीच चल रही तनातनी अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। ताजा घटनाक्रम में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp ने दावा किया है कि रूस उसकी सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रहा है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा है कि वह रूसी यूजर्स को कनेक्टेड रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। हालांकि, रूसी प्रशासन की ओर से साफ संकेत दिए गए हैं कि जब तक कंपनी स्थानीय कानूनों का पालन नहीं करती, तब तक राहत मिलना मुश्किल है।

पहले से सीमित थीं कई सेवाएं

रूस में WhatsApp की कुछ सेवाएं पहले ही प्रतिबंधित की जा चुकी थीं। पिछले साल सरकार ने WhatsApp और Telegram की कॉलिंग सेवाओं पर रोक लगा दी थी। अधिकारियों का कहना था कि ये प्लेटफॉर्म्स धोखाधड़ी और आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे थे। इसके बाद दिसंबर में Apple की FaceTime और Snapchat पर भी कार्रवाई की गई थी।

अब सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस के संचार नियामक Roskomnadzor ने WhatsApp को अपनी आधिकारिक ऑनलाइन डायरेक्टरी से हटा दिया है। यह कदम संभावित पूर्ण बैन की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। रूस में लाखों लोग WhatsApp का इस्तेमाल करते हैं और किसी भी व्यापक प्रतिबंध का असर सीधे आम नागरिकों, छोटे कारोबारियों और फ्रीलांस प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा।

रूस क्यों बढ़ा रहा है दबाव?

यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस ने कई अमेरिकी और पश्चिमी कंपनियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सरकार का कहना है कि विदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को देश के डेटा और साइबर सुरक्षा कानूनों का सख्ती से पालन करना होगा।

विश्लेषकों का मानना है कि रूस अपनी घरेलू डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करना चाहता है। सरकार द्वारा समर्थित “MAX” नाम की ऐप को बढ़ावा दिया जा रहा है। आलोचकों का आरोप है कि इस तरह की सरकारी ऐप्स के जरिए नागरिकों की गतिविधियों पर निगरानी आसान हो सकती है, हालांकि सरकार इन दावों को खारिज करती रही है।

मेटा और क्रेमलिन की स्थिति

WhatsApp की पैरेंट कंपनी मेटा की ओर से कहा गया है कि वह यूजर्स की गोपनीयता और सुरक्षित संचार के प्रति प्रतिबद्ध है। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि वह रूसी यूजर्स को सेवाएं जारी रखने के विकल्प तलाश रही है।

दूसरी ओर, क्रेमलिन के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि यह मामला “कानून के पालन” से जुड़ा है। उनके मुताबिक, अगर मेटा रूसी कानूनों के अनुरूप काम करने और अधिकारियों के साथ बातचीत शुरू करने को तैयार होती है, तो प्रतिबंध हटाने पर विचार किया जा सकता है। लेकिन यदि कंपनी नियमों को मानने से इनकार करती है, तो बैन हटने की संभावना बेहद कम है।

आम यूजर्स पर क्या होगा असर?

अगर WhatsApp पर पूर्ण प्रतिबंध लागू होता है, तो इसका असर सिर्फ चैटिंग तक सीमित नहीं रहेगा। रूस में छोटे व्यापारी, ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर, स्टार्टअप्स और फ्रीलांस काम करने वाले लाखों लोग WhatsApp के जरिए अपने क्लाइंट्स से जुड़े रहते हैं। ऐसे में यह कदम डिजिटल कम्युनिकेशन के ढांचे को प्रभावित कर सकता है।

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