UP Budget 2026-27: चुनावी साल में महिलाओं पर खास फोकस, योगी सरकार की स्कूटी से स्किल तक बड़ी घोषणाएं

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Javed Haider Zaidi

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स्कूटी चलाती छात्राएं और सिलाई मशीन पर काम करती महिलाएं, यूपी बजट में महिला सशक्तिकरण की झलक

UP Budget 2026-27: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ Yogi Adityanath सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का अंतिम बजट पेश कर दिया है। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 9 लाख 12 हजार 696 करोड़ रुपये का बजट विधानसभा में प्रस्तुत किया। यह बजट चालू वित्त वर्ष की तुलना में 12.9 प्रतिशत अधिक है। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य का बजट लगभग 8 लाख 70 हजार करोड़ रुपये का था।

2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पेश किया गया यह बजट कई मायनों में अहम माना जा रहा है। सरकार ने इसमें हर वर्ग को साधने की कोशिश की है, लेकिन विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को केंद्र में रखा गया है। बजट भाषण में महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं।

महिलाओं की सुरक्षा पर सरकार का दावा

बजट के दौरान सरकार ने महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में कमी आने का दावा भी पेश किया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 की तुलना में हत्या के मामलों में 48 प्रतिशत, दहेज मृत्यु में 19 प्रतिशत, बलात्कार में 67 प्रतिशत और शील भंग के मामलों में 34 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। सरकार ने इसे कानून-व्यवस्था में सुधार का परिणाम बताया।

हालांकि उत्तर प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहां महिलाओं को सीधे नकद सहायता देने वाली कोई बड़ी योजना नहीं चलाई जाती, जबकि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों में ऐसी योजनाएं लागू हैं। इस पृष्ठभूमि में योगी सरकार ने महिलाओं के लिए संरचनात्मक और सशक्तिकरण आधारित योजनाओं पर जोर दिया है।

मेधावी छात्राओं को मिलेगी स्कूटी

बजट की सबसे चर्चित घोषणा ‘रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना’ रही। इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है। पात्र छात्राओं को स्कूटी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे कॉलेज और विश्वविद्यालय आने-जाने में किसी तरह की दिक्कत का सामना न करें।

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सरकार का मानना है कि परिवहन की समस्या कई बार छात्राओं की पढ़ाई में बाधा बनती है। ऐसे में यह योजना ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की छात्राओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकती है।

स्किल डेवलपमेंट और जॉब प्लेसमेंट पर जोर

महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने विशेष स्किल डेवलपमेंट केंद्र खोलने की घोषणा की है। इन केंद्रों में बाजार की मांग के अनुरूप तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही महिलाओं के लिए डेडिकेटेड जॉब प्लेसमेंट सेंटर भी स्थापित किए जाएंगे।

इन केंद्रों का उद्देश्य सिर्फ प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षित महिलाओं को रोजगार से जोड़ना भी होगा। सरकार का दावा है कि इससे बड़ी संख्या में महिलाओं को औपचारिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलेंगे और वे स्वरोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगी।

चुनाव से पहले सशक्तिकरण का संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार ने महिला मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का खाका तैयार किया है। शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार—इन तीनों क्षेत्रों में महिलाओं को केंद्र में रखकर सरकार ने अपने एजेंडे को स्पष्ट किया है।

हालांकि विपक्ष इन घोषणाओं को चुनावी रणनीति बता रहा है, लेकिन यह भी सच है कि यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो बड़ी संख्या में छात्राओं और महिलाओं को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।

आगे की राह

अब सबकी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि घोषित योजनाएं जमीन पर कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ लागू होती हैं। स्कूटी योजना से लेकर स्किल डेवलपमेंट केंद्रों तक, यदि लाभ सही पात्रों तक पहुंचता है, तो यह बजट महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर उठे सवाल

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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर राजनीतिक चर्चा

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय में सौंप दिया है। इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह रहा कि नेता विपक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर इस नोटिस में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

विपक्षी सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह नोटिस दिया है। आरोप है कि लोकसभा स्पीकर का रवैया सदन के संचालन में भेदभावपूर्ण रहा है और विपक्ष को बार-बार बोलने से रोका गया। नोटिस में स्पीकर के आचरण को लेकर चार प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।

विपक्ष का कहना है कि 2 फरवरी को नेता विपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद 3 फरवरी को विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किया गया, जिसे एकतरफा कार्रवाई बताया गया है। 4 फरवरी को सत्ता पक्ष के एक सांसद द्वारा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का भी जिक्र नोटिस में है। आरोप है कि विपक्ष की आपत्ति के बावजूद उस टिप्पणी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही स्पीकर द्वारा विपक्षी महिला सांसदों को लेकर की गई टिप्पणी को भी आपत्तिजनक बताया गया है।

हालांकि प्रस्ताव लाने वाले सांसदों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से लोकसभा स्पीकर का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता और संतुलन की कमी दिखाई दी है। नोटिस मिलने के बाद लोकसभा स्पीकर ने सचिव जनरल को इसकी जांच करने और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष के पास संख्या बल न होने के बावजूद यह प्रस्ताव एक संदेश देने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है और चेयर से अपेक्षा होती है कि वह सभी सांसदों के साथ समान व्यवहार करे।

राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने को लेकर पूछे गए सवाल पर मोहम्मद जावेद ने कहा कि भले ही राहुल गांधी ने साइन नहीं किए हों, लेकिन 118 सांसदों का समर्थन अपने आप में एक मजबूत संदेश है। वहीं टीएमसी के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों के हस्ताक्षर भले ही नोटिस पर न हों, लेकिन वे विपक्ष के साथ खड़े हैं।

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