बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव का तीखा हमला: बोले— ‘हमारी तो भ्रूण हत्या कराई जा रही थी, अब आर-पार की लड़ाई होगी’

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Javed Haider Zaidi

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पटना में आरजेडी कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव, मंच पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ दिखाई देते हुए।

पटना। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद तेजस्वी यादव पहली बार पार्टी कार्यालय पहुंचे, जहां उनका जोरदार स्वागत और अभिनंदन किया गया। इस मौके पर उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए केंद्र और राज्य की राजनीति पर तीखा हमला बोला और साफ कहा कि अब अन्याय के खिलाफ चुप रहने का समय खत्म हो चुका है। तेजस्वी यादव ने कहा कि पार्टी और लालू प्रसाद यादव की विचारधारा के लिए काम करने वालों को अब हर स्तर पर मजबूती से जवाब देना होगा।

समारोह में राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल, वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी, अवध बिहारी चौधरी, आलोक मेहता समेत कई बड़े नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। तेजस्वी यादव के संबोधन के दौरान कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला।

“कोई भी गाली देगा तो चुप मत रहिए”

अपने भाषण में तेजस्वी यादव ने कहा कि राजद कार्यकर्ताओं को अब डरने या चुप रहने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “कोई भी गाली देगा तो चुप मत रहिए। अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। जैसा करोगे, वैसा भरोगे। अभी इनका समय है, लेकिन हमारा दौर भी आएगा।”
तेजस्वी ने यह भी कहा कि राजद लगातार जनता की आवाज उठाती रहेगी और अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।

“हमारी तो भ्रूण हत्या कराई जा रही थी”

तेजस्वी यादव ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि बहुत कम उम्र में ही उन्हें जांच एजेंसियों के मामलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, “हमारी तो भ्रूण हत्या कराई जा रही थी। जब मूंछ भी नहीं आई थी, तब सीबीआई और ईडी के केस करवा दिए गए। नीतीश जी को भाजपा के साथ जाना था, लेकिन हमें हटाने का कोई मौका नहीं मिल रहा था, इसलिए मुकदमा करवा दिया गया।”

डिप्टी सीएम से नेता प्रतिपक्ष तक का सफर

तेजस्वी यादव ने कहा कि उन्हें देश का सबसे युवा डिप्टी सीएम बनने का सौभाग्य मिला, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने के बाद वह नेता प्रतिपक्ष बने। उन्होंने कहा कि राजद ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है और अब उनका लक्ष्य लालू प्रसाद यादव के सपनों को साकार करना है।
उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाएगा और उनका सपना है कि आरजेडी को एक बार फिर राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिले।

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होली के बाद बिहार दौरा, संगठन पर फोकस

तेजस्वी यादव ने ऐलान किया कि होली के बाद वह पूरे बिहार का दौरा करेंगे और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह केवल “अधिकारियों के मुख्यमंत्री” बनकर रह गए हैं।
तेजस्वी ने कहा, “बिहार में अगर कोई नेता है तो वह लालू प्रसाद यादव हैं। एनडीए नेताओं का काम 24 घंटे लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव को गाली देना ही रह गया है।”

भाजपा और एजेंसियों पर सीधा वार

तेजस्वी यादव ने लालू प्रसाद यादव का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा भाजपा की विभाजनकारी राजनीति से देश को आगाह किया। उन्होंने कहा, “राजद न कभी भाजपा के सामने झुकेगी, न भाजपा की एजेंसियों से डरेगी और न ही कभी भाजपा के साथ समझौता करेगी।”

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर उठे सवाल

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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर राजनीतिक चर्चा

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय में सौंप दिया है। इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह रहा कि नेता विपक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर इस नोटिस में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

विपक्षी सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह नोटिस दिया है। आरोप है कि लोकसभा स्पीकर का रवैया सदन के संचालन में भेदभावपूर्ण रहा है और विपक्ष को बार-बार बोलने से रोका गया। नोटिस में स्पीकर के आचरण को लेकर चार प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।

विपक्ष का कहना है कि 2 फरवरी को नेता विपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद 3 फरवरी को विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किया गया, जिसे एकतरफा कार्रवाई बताया गया है। 4 फरवरी को सत्ता पक्ष के एक सांसद द्वारा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का भी जिक्र नोटिस में है। आरोप है कि विपक्ष की आपत्ति के बावजूद उस टिप्पणी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही स्पीकर द्वारा विपक्षी महिला सांसदों को लेकर की गई टिप्पणी को भी आपत्तिजनक बताया गया है।

हालांकि प्रस्ताव लाने वाले सांसदों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से लोकसभा स्पीकर का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता और संतुलन की कमी दिखाई दी है। नोटिस मिलने के बाद लोकसभा स्पीकर ने सचिव जनरल को इसकी जांच करने और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष के पास संख्या बल न होने के बावजूद यह प्रस्ताव एक संदेश देने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है और चेयर से अपेक्षा होती है कि वह सभी सांसदों के साथ समान व्यवहार करे।

राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने को लेकर पूछे गए सवाल पर मोहम्मद जावेद ने कहा कि भले ही राहुल गांधी ने साइन नहीं किए हों, लेकिन 118 सांसदों का समर्थन अपने आप में एक मजबूत संदेश है। वहीं टीएमसी के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों के हस्ताक्षर भले ही नोटिस पर न हों, लेकिन वे विपक्ष के साथ खड़े हैं।

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