‘यह साजिश नहीं, अदालत का आदेश है’— पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर BJP-JDU का जवाब, बिहार की सियासत में तेज हुई बहस

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

बिहार में पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक हलचल, बीजेपी और जेडीयू नेताओं के बयान के बीच मीडिया से घिरे पप्पू यादव की फाइल फोटो, पृष्ठभूमि में पुलिस और बिहार विधानसभा का दृश्य

पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर बिहार की राजनीति में एक बार फिर उबाल देखने को मिल रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। जहां एक ओर बीजेपी और जेडीयू इसे कानून और अदालत के आदेश का स्वाभाविक परिणाम बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में ‘कानून बनाम राजनीति’ की बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है।

पप्पू यादव  (Pappu Yadav) की छवि एक मुखर और जुझारू जननेता की रही है। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी को केवल एक कानूनी कार्रवाई के रूप में नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।

‘कानून सबके लिए बराबर है’— बीजेपी

बीजेपी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर साफ शब्दों में कहा कि कानून के सामने कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। आम नागरिक हो या सांसद, सभी के लिए कानून समान है। उन्होंने कहा कि जब भी पप्पू यादव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती है, वह उसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश करते हैं और खुद को पीड़ित के रूप में पेश करते हैं।

प्रभाकर मिश्रा ने आरोप लगाया कि इस बार भी पप्पू यादव ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल को ढाल बनाकर बचने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है और इसे सियासी साजिश बताना गलत है।

‘अदालत के फैसले का सम्मान जरूरी’— जेडीयू

वहीं जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश का सम्मान करना हर नागरिक का संवैधानिक कर्तव्य है। पप्पू यादव अदालत के आदेश की अवहेलना कर रहे थे, इसलिए प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी।

Also Read

नीरज कुमार ने यह भी कहा कि हर कानूनी कार्रवाई को राजनीति से जोड़ना सही नहीं है। कानून अपना काम कर रहा है और इसमें सरकार की कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।

विपक्ष का आरोप, सत्ता पक्ष का पलटवार

पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर राजनीतिक दबाव और बदले की कार्रवाई का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि सत्ता पक्ष अपने विरोधियों की आवाज दबाने के लिए कानून का इस्तेमाल कर रहा है। वहीं बीजेपी और जेडीयू लगातार यह दोहरा रहे हैं कि यह पूरी तरह न्यायालय के आदेश के तहत की गई कार्रवाई है।

बिहार की राजनीति में बढ़ा तनाव

इस घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में माहौल और गरमा गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। एक तरफ सत्ता पक्ष ‘कानून का राज’ होने का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहा है।

Next Post

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर उठे सवाल

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर राजनीतिक चर्चा

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय में सौंप दिया है। इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह रहा कि नेता विपक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर इस नोटिस में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

विपक्षी सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह नोटिस दिया है। आरोप है कि लोकसभा स्पीकर का रवैया सदन के संचालन में भेदभावपूर्ण रहा है और विपक्ष को बार-बार बोलने से रोका गया। नोटिस में स्पीकर के आचरण को लेकर चार प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।

विपक्ष का कहना है कि 2 फरवरी को नेता विपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद 3 फरवरी को विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किया गया, जिसे एकतरफा कार्रवाई बताया गया है। 4 फरवरी को सत्ता पक्ष के एक सांसद द्वारा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का भी जिक्र नोटिस में है। आरोप है कि विपक्ष की आपत्ति के बावजूद उस टिप्पणी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही स्पीकर द्वारा विपक्षी महिला सांसदों को लेकर की गई टिप्पणी को भी आपत्तिजनक बताया गया है।

हालांकि प्रस्ताव लाने वाले सांसदों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से लोकसभा स्पीकर का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता और संतुलन की कमी दिखाई दी है। नोटिस मिलने के बाद लोकसभा स्पीकर ने सचिव जनरल को इसकी जांच करने और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष के पास संख्या बल न होने के बावजूद यह प्रस्ताव एक संदेश देने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है और चेयर से अपेक्षा होती है कि वह सभी सांसदों के साथ समान व्यवहार करे।

राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने को लेकर पूछे गए सवाल पर मोहम्मद जावेद ने कहा कि भले ही राहुल गांधी ने साइन नहीं किए हों, लेकिन 118 सांसदों का समर्थन अपने आप में एक मजबूत संदेश है। वहीं टीएमसी के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों के हस्ताक्षर भले ही नोटिस पर न हों, लेकिन वे विपक्ष के साथ खड़े हैं।

Next Post

Loading more posts...