इंग्लैंड और काउंटी क्रिकेट के भरोसेमंद तेज़ गेंदबाज़ रहे Tony Pigott (टोनी पिगोट) का 67 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके जाने की खबर ने इंग्लिश क्रिकेट को भीतर तक झकझोर दिया है। टोनी पिगॉट उन खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्होंने सुर्खियों से दूर रहकर भी खेल की मजबूत नींव तैयार की और लंबे समय तक क्रिकेट की सेवा की।
टोनी पिगॉट को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ज्यादा मौके नहीं मिले, लेकिन जब भी उन्हें अवसर मिला, उन्होंने पूरी ईमानदारी से अपनी भूमिका निभाई। उन्होंने इंग्लैंड के लिए वर्ष 1984 में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ क्राइस्टचर्च में अपना एकमात्र टेस्ट मैच खेला। इस मुकाबले में पिगॉट ने अनुशासित गेंदबाज़ी करते हुए पहली पारी में दो महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। हालांकि इंग्लैंड की टीम यह टेस्ट मैच हार गई, लेकिन पिगॉट का प्रदर्शन उनके जज़्बे और मेहनत को दर्शाने के लिए काफी था। बल्लेबाज़ी में भी उन्होंने उपयोगी रन जोड़ते हुए टीम के लिए योगदान दिया।
अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों से कहीं ज्यादा मजबूत और प्रभावशाली रहा टोनी पिगॉट का घरेलू क्रिकेट करियर। उन्होंने ससेक्स और सरे के लिए 17 वर्षों तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला और 260 मैचों में 672 विकेट हासिल किए। यह आंकड़ा उनकी निरंतरता, फिटनेस और मानसिक मजबूती का साफ संकेत देता है। तेज़ गेंदबाज़ होने के बावजूद उन्होंने बल्लेबाज़ी में भी टीम का साथ निभाया और करीब पांच हज़ार रन बनाए, जिसमें एक शतक और कई अहम अर्धशतक शामिल रहे।
लिस्ट-ए क्रिकेट में भी पिगॉट का प्रदर्शन किसी से कम नहीं रहा। उन्होंने सीमित ओवरों के प्रारूप में 377 विकेट लेकर खुद को एक प्रभावशाली और भरोसेमंद गेंदबाज़ साबित किया। उनकी गेंदबाज़ी की पहचान रही—सटीक लाइन-लेंथ, धैर्य और बल्लेबाज़ों पर लगातार दबाव बनाए रखने की क्षमता।
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद टोनी पिगॉट ने खेल से दूरी नहीं बनाई। उन्होंने प्रशासनिक भूमिकाओं में रहकर भी क्रिकेट की सेवा जारी रखी। वह ससेक्स काउंटी क्रिकेट क्लब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने और बाद में इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड से जुड़कर तकनीकी जिम्मेदारियां संभालीं। पिच लायज़न ऑफिसर और बाद में क्रिकेट लायज़न ऑफिसर के रूप में उन्होंने घरेलू क्रिकेट के संचालन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई।
उनकी जिम्मेदारियों में पिच की गुणवत्ता का मूल्यांकन, अंपायरों और ग्राउंड स्टाफ के साथ समन्वय और खेल की गरिमा बनाए रखने का कार्य शामिल था। पर्दे के पीछे रहकर किए गए उनके इन प्रयासों ने आधुनिक मैच प्रबंधन प्रणाली को मजबूत आधार दिया।
टोनी पिगॉट का जीवन इस बात का उदाहरण है कि क्रिकेट केवल चमक-दमक और रिकॉर्ड्स का खेल नहीं, बल्कि अनुशासन, ईमानदारी और समर्पण की भी कहानी है। उनके निधन से इंग्लिश क्रिकेट ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है जिसने बिना शोर मचाए, पूरे मन से खेल की सेवा की। क्रिकेट जगत में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाता रहेगा।