अलबिंदर ढींडसा बने एटर्नल ग्रुप के नए CEO, जोमैटो और ब्लिंकिट में होंगे बड़े बदलाव

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Javed Haider Zaidi

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अलबिंदर ढींडसा एटर्नल ग्रुप के नए CEO, Blinkit और Zomato में बदलाव की योजना

भारत के स्टार्टअप और ई-कॉमर्स जगत के प्रसिद्ध उद्यमी (Albinder Dhindsa) अलबिंदर ढींडसा अब एटर्नल (Eternal) ग्रुप के नए CEO बन गए हैं। एटर्नल ग्रुप Blinkit और Zomato जैसी कंपनियों की पैरेंट कंपनी है।
अलबिंदर ढींडसा के नेतृत्व में इन कंपनियों में आने वाले समय में कई बड़े और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। भारत में क्विक कॉमर्स (10 मिनट में डिलीवरी) के जनक माने जाने वाले अलबिंदर का विजन अब पूरे ग्रुप में झलकेगा और कंपनी की रणनीतियों में नई दिशा देगा।

अलबिंदर ढींडसा कौन हैं?

अलबिंदर ढींडसा Blinkit (पूर्व में Grofers) के सह-संस्थापक और CEO रहे हैं। वे पंजाब के पटियाला के रहने वाले हैं और भारत में क्विक कॉमर्स क्रांति के मुख्य स्तंभों में से एक माने जाते हैं। Blinkit की स्थापना के बाद से अलबिंदर ने देश में ई-कॉमर्स और त्वरित डिलीवरी के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया।

उनकी दूरदर्शिता और बिजनेस रणनीति की वजह से उन्हें अब एटर्नल ग्रुप का CEO बनाया गया है। अब उनकी जिम्मेदारी न केवल Blinkit बल्कि पूरे ग्रुप के संचालन और विकास की होगी।

शिक्षा और करियर का सफर

अलबिंदर ढींडसा की सफलता की कहानी मेहनत और शानदार शिक्षा का परिणाम है। उन्होंने IIT दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक (B.Tech) किया। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की कोलंबिया बिजनेस स्कूल से MBA की डिग्री हासिल की।

MBA के बाद उनका करियर अमेरिका में शुरू हुआ, जहां उन्होंने URS Corporation में ट्रांसपोर्टेशन एनालिस्ट के रूप में काम किया। इसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज सिस्टमैटिक्स जैसी कंपनियों में अनुभव हासिल किया।

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भारत लौटने के बाद उन्होंने जोमैटो (Zomato) में ‘हेड ऑफ इंटरनेशनल ऑपरेशंस’ के रूप में काम किया। यहीं से उनकी उद्यमिता की नींव पड़ी और उन्होंने भारत में ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स को नई दिशा दी।

Grofers से Blinkit तक का सफर

साल 2013 में अलबिंदर ने सौरभ कुमार के साथ मिलकर Grofers की स्थापना की। 2021 में Grofers को Blinkit के नाम से रीब्रांड किया गया। Blinkit की तेज और कुशल डिलीवरी मॉडल ने देश में क्विक कॉमर्स की परिभाषा बदल दी।

साल 2022 में जोमैटो ने Blinkit को 4,447 करोड़ रुपये में अधिग्रहित किया। अलबिंदर की दूरदर्शिता और प्रबंधन क्षमता के चलते Blinkit भारत की प्रमुख क्विक डिलीवरी कंपनियों में शामिल हो गई।

नेटवर्थ और आय

जनवरी 2026 के अनुसार, अलबिंदर ढींडसा की अनुमानित नेटवर्थ लगभग 1.1 बिलियन डॉलर (करीब 10,000 करोड़ रुपये) है। उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा Blinkit और जोमैटो में उनकी हिस्सेदारी से आता है।

हालांकि उनकी मासिक सैलरी सार्वजनिक नहीं है, लेकिन एटर्नल ग्रुप के CEO के रूप में उनकी कुल आय, जिसमें ESOPs और स्टॉक ऑप्शंस शामिल हैं, करोड़ों में आंकी जा सकती है।

परिवार और निजी जीवन

अलबिंदर अपनी निजी जिंदगी को काफी गुप्त रखते हैं। उनकी शादी आकृति चोपड़ा से हुई है, जो Blinkit और जोमैटो की सह-संस्थापक रही हैं और कंपनी में चीफ पीपल ऑफिसर (CPO) के पद पर काम कर चुकी हैं।

अलबिंदर का परिवार पंजाब के पटियाला में रहता है। उनके पिता और परिवार ने शिक्षा पर जोर दिया, जो उनके सफर की सफलता में अहम भूमिका निभाई।

भविष्य की योजनाएं

अलबिंदर ढींडसा के नेतृत्व में एटर्नल ग्रुप अब तेजी से क्विक कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में विस्तार करने की योजना बना रहा है। Blinkit और Zomato जैसी कंपनियों में आने वाले बदलाव और नए इनोवेशन भारतीय ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी इंडस्ट्री में नई क्रांति ला सकते हैं।

उनकी रणनीति और विजन यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में भारत में ऑनलाइन शॉपिंग और डिलीवरी की दुनिया में और भी तेजी आएगी।

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PPF निवेशकों के लिए अहम खबर: अप्रैल में इस तारीख को भूलना पड़ सकता है महंगा

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"PPF निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अप्रैल में जरूरी तारीख की जानकारी, सही समय पर जमा करने पर ज्यादा ब्याज, देर से निवेश करने पर नुकसान, PPF की ब्याज दर और फायदे, सुरक्षित लंबी अवधि की निवेश योजना, 1 से 5 तारीख के बीच निवेश करने के लाभ।"

अगर आप सुरक्षित और लंबे समय के निवेश की सोच रहे हैं, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) आपके लिए सबसे भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। यह सरकारी योजना न सिर्फ आपका पैसा सुरक्षित रखती है, बल्कि समय के साथ अच्छा रिटर्न भी देती है। लेकिन PPF में निवेश करते समय एक छोटी-सी तारीख की अनदेखी आपको सालभर के ब्याज में नुकसान पहुँचा सकती है। खासतौर पर अप्रैल महीने में यह बहुत अहम है।

PPF में निवेश का सही समय क्यों है जरूरी?

PPF में ब्याज की गणना हर महीने 5 तारीख से लेकर महीने के आखिरी दिन के बीच के न्यूनतम बैलेंस के आधार पर होती है। इसका मतलब साफ है:

  • अगर आप 1 से 5 अप्रैल के बीच निवेश करते हैं, तो आपको उस महीने का पूरा ब्याज मिलेगा।
  • लेकिन अगर आप 5 अप्रैल के बाद पैसा जमा करते हैं, तो ब्याज केवल अगले महीने से जुड़ना शुरू होगा।

यानी सिर्फ कुछ दिनों की देरी भी आपके सालभर के रिटर्न को कम कर सकती है।

देरी से निवेश करने पर कितना नुकसान हो सकता है?

आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लीजिए आपने PPF अकाउंट में 1.5 लाख रुपये जमा किए।

  • अगर राशि 1 से 5 तारीख के बीच जमा होती है, तो सालाना ब्याज लगभग ₹10,650 होगा।
  • वहीं, अगर आप 5 तारीख के बाद निवेश करते हैं, तो सालाना ब्याज घटकर लगभग ₹9,763 रह जाता है।

यानी केवल एक दिन की देरी से लगभग ₹887 का नुकसान हो सकता है।

यह नुकसान छोटा लग सकता है, लेकिन PPF लंबी अवधि की योजना है, इसलिए समय पर निवेश करने से लंबे समय में काफी बड़ा फर्क पड़ता है।

PPF योजना के फायदे और खासियतें

PPF योजना को खासतौर पर सुरक्षित निवेश की तलाश करने वाले लोग पसंद करते हैं। इसकी कुछ मुख्य खूबियां हैं:

  • लंबी अवधि का निवेश: 15 साल
  • न्यूनतम निवेश राशि: ₹500
  • अधिकतम निवेश राशि: ₹1.5 लाख सालाना
  • ब्याज दर: करीब 7.1% (वर्तमान में)
  • टैक्स लाभ: धारा 80C के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री

यह योजना उन निवेशकों के लिए आदर्श है, जो बिना जोखिम लिए लंबे समय में अच्छा फंड बनाना चाहते हैं।

निवेश करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  1. कोशिश करें कि 1 से 5 तारीख के बीच ही पैसा जमा करें।
  2. अगर पूरे साल की एकमुश्त राशि जमा करना संभव नहीं है, तो हर महीने की शुरुआत में निवेश करें।
  3. PPF को लंबी अवधि की योजना मानकर ही निवेश करें।
  4. समय पर निवेश करने से आपके सालभर के ब्याज में बढ़ोतरी होगी।
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