क्या खत्म हो रहा OnePlus का ‘Never Settle’ युग?: स्मार्टफोन की दुनिया में “Never Settle” का नारा देकर पहचान बनाने वाला OnePlus इन दिनों अपने सबसे कठिन दौर से गुजरता नजर आ रहा है। एक हालिया इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट ने टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट का दावा है कि OnePlus को बिना किसी आधिकारिक घोषणा के धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है, यानी ब्रांड को बंद किए बिना उसकी ताकत, पहचान और टीमों को सीमित किया जा रहा है। यह वही कॉरपोरेट रणनीति मानी जा रही है, जो इससे पहले Nokia, BlackBerry, HTC और LG जैसे बड़े ब्रांड्स के साथ अपनाई जा चुकी है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह महज अफवाह नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठोस आंकड़े और इंडस्ट्री एनालिसिस मौजूद हैं। Android Headlines की रिपोर्ट में चीन, भारत, अमेरिका और यूरोप में काम कर चुके मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों से बातचीत की गई है। इसके अलावा चार स्वतंत्र एनालिस्ट फर्मों के डेटा का भी हवाला दिया गया है, जो OnePlus की गिरती स्थिति की ओर इशारा करते हैं।
आंकड़े बताते हैं कि 2024 में OnePlus की ग्लोबल शिपमेंट में 20 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसके उलट, OnePlus की पैरेंट कंपनी OPPO ग्रुप ने इसी अवधि में 2.8 प्रतिशत की ग्रोथ हासिल की। एनालिस्ट्स का कहना है कि OPPO की यह बढ़त पूरी तरह उसके अपने ब्रांड्स के दम पर आई है, जबकि OnePlus ग्रुप के भीतर अपेक्षाकृत कमजोर कड़ी बनता जा रहा था।
भारत, जो लंबे समय तक OnePlus का सबसे मजबूत बाजार माना जाता था, वहां भी हालात तेजी से बदले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 के दौरान हजारों रिटेल स्टोर्स ने कम मार्जिन और वारंटी से जुड़ी समस्याओं के चलते OnePlus स्मार्टफोन बेचना बंद कर दिया। इसका सीधा असर कंपनी की बाजार हिस्सेदारी पर पड़ा। प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में OnePlus की हिस्सेदारी एक साल के भीतर 21 प्रतिशत से घटकर सिर्फ 6 प्रतिशत रह गई। चीन में भी ब्रांड अपने तय बिक्री लक्ष्यों से काफी पीछे बताया जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि OnePlus के ग्लोबल ऑपरेशंस में बड़े स्तर पर कटौती की गई है। अमेरिका में कंपनी का डलास स्थित हेडक्वार्टर बिना किसी आधिकारिक घोषणा के बंद कर दिया गया। यूरोप में OnePlus की टीमें लगभग समाप्त हो चुकी हैं, जबकि भारत में बड़े रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर को लेकर किए गए वादे अब तक कागजों तक ही सीमित हैं। इसके साथ ही, कई अहम प्रोडक्ट्स पर भी ब्रेक लग गया है। फोल्डेबल स्मार्टफोन OnePlus Open-2 और एक कॉम्पैक्ट फ्लैगशिप फोन जैसे प्रोजेक्ट्स को कथित तौर पर रद्द कर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अब OnePlus से जुड़े अधिकतर अहम फैसले सीधे चीन से लिए जा रहे हैं। रीजनल टीमों की भूमिका सीमित हो गई है और वे केवल निर्देशों का पालन कर रही हैं। इससे यह संकेत मिलते हैं कि ब्रांड की स्वतंत्र पहचान धीरे-धीरे खत्म की जा रही है।
हालांकि, रिपोर्ट में मौजूदा OnePlus यूजर्स के लिए राहत की बात भी कही गई है। इसमें साफ किया गया है कि कंपनी अपने मौजूदा ग्राहकों से किए गए वादों पर कायम रहेगी। यूजर्स को पहले की तरह वॉरंटी सपोर्ट, सॉफ्टवेयर अपडेट और सिक्योरिटी पैच मिलते रहेंगे, जिससे उनके डिवाइसेज की सुरक्षा और परफॉर्मेंस पर असर नहीं पड़ेगा।
OnePlus ने एक समय यह साबित किया था कि कम कीमत में भी फ्लैगशिप लेवल का अनुभव दिया जा सकता है। यही वजह थी कि ब्रांड ने बहुत कम समय में दुनियाभर में बड़ी फैन फॉलोइंग बना ली थी। अगर यह इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट सही साबित होती है, तो टेक इंडस्ट्री एक ऐसे ब्रांड को खो सकती है जिसने प्रतिस्पर्धा और इनोवेशन की दिशा बदल दी थी।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि OPPO ग्रुप आगे क्या कदम उठाता है। क्या OnePlus की विरासत को किसी नए रूप में बचाया जाएगा या फिर “Never Settle” का नारा सिर्फ टेक इतिहास की एक याद बनकर रह जाएगा। आने वाले महीनों में OnePlus और OPPO की रणनीति इस सवाल का जवाब दे सकती है।