बिहार के बक्सर जिले के छोटे से गांव बखोरापुर से निकलकर अमेरिका की टेक्नोलॉजी दुनिया में अपना नाम बनाने वाले सत्यम कुमार की कहानी प्रेरक और प्रेरणा देने वाली है। मात्र 13 साल की उम्र में IIT कानपुर में प्रवेश और 24 साल में PhD पूरी करने वाले सत्यम आज AI रिसर्चर के रूप में अमेरिका में काम कर रहे हैं।
बिहार के छोटे गांव से IIT तक
बिहार के किसान के बेटे सत्यम कुमार: बक्सर जिले के बखोरापुर गांव में जन्मे सत्यम कुमार (Satyam Kumar) का परिवार किसान है। बचपन से ही सत्यम ने अपनी असाधारण प्रतिभा का संकेत दे दिया था। 2012 में मात्र 13 साल की उम्र में उन्होंने ऑल इंडिया 670वीं रैंक के साथ IIT कानपुर के बीटेक-एमटेक डुअल डिग्री कोर्स में प्रवेश लिया। इस उम्र में देश के सबसे कम उम्र के IITian बनने का रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज हुआ।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सत्यम ने 2011 में भी JEE पास किया था, लेकिन रैंक अधिक होने के कारण 2012 में प्रवेश मिला। उनके इस सफर ने साबित कर दिया कि प्रतिभा और मेहनत उम्र की मोहताज नहीं होती।
IIT कानपुर में चुनौतियों के बीच सफलता
IIT कानपुर में सबसे कम उम्र के छात्र होने के कारण सत्यम कुमार पर काफी दबाव था। लेकिन उन्होंने पढ़ाई और रिसर्च पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित रखा। उनके साथी और शिक्षक भी उनकी लगन और बुद्धिमत्ता की तारीफ करते हैं।
2018 में बीटेक और एमटेक पूरी करने के बाद, सत्यम ने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका की राह चुनी। उन्होंने टेक्सास यूनिवर्सिटी, ऑस्टिन से इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में PhD पूरी की। इस उम्र में डॉक्टरेट हासिल करना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरक उदाहरण बन गया।
अमेरिका में AI रिसर्चर के रूप में करियर
सत्यम कुमार वर्तमान में अमेरिका की एक प्रमुख टेक कंपनी में AI Researcher के रूप में काम कर रहे हैं। उनका मुख्य काम मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जटिल एल्गोरिदम पर रिसर्च करना है।
सत्यम AI को ज्यादा सुरक्षित, स्मार्ट और स्किल्ड बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि आने वाला समय पूरी तरह AI और मशीन लर्निंग का है, और भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए युवा प्रतिभाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर देने की जरूरत है।
सफलता का राज: मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति
सत्यम कुमार की सफलता का मुख्य कारण उनकी कड़ी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति है। उनका मानना है कि “उम्र केवल एक नंबर है। अगर आपके पास सही मार्गदर्शन और दृढ़ निश्चय है, तो आप दुनिया का कोई भी मुकाम हासिल कर सकते हैं।”
उनकी कहानी सिर्फ बिहार या भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सत्यम ने यह साबित कर दिया कि सपनों को साकार करने के लिए सही दिशा और मेहनत सबसे बड़ा हथियार है।