ज़ैदपुर, बाराबंकी: स्थानीय शिया समुदाय ने 28 रजब के अवसर पर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की कर्बला यात्रा की याद में भव्य जुलूस और मजलिस का आयोजन किया। इस अवसर पर नगर के प्रमुख मार्गों और ऐतिहासिक रास्तों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
सुबह 10 बजे आयोजित मरकज़ी मजलिस का आगाज़ क़ुरआने मजीद की तिलावत से हुआ। तिलावत का फरायज़ जनाब अरशद साहब ने अंजाम दिए, उनके बाद जनाब अबुल अब्बास रिज़वी साहब और जनाब अली अब्बास ज़ैदी सहाब ने पेशख़वानी की। जबकि निज़ामत के फरायज़ मौलाना ज़मन हैदर साहब ने अंजाम दिए।
मुख्य खि़ताब में मौलाना हसनैन बाक़री साहब ने “हक और बातिल” के विषय पर संबोधन किया। उन्होंने बताया कि कर्बला की जंग हक़ और बातिल के बीच हुई थी और इसका असली मक़सद केवल जानकारी हासिल करना नहीं बल्कि उसे अपने जीवन में अमल करना है। मौलाना साहब ने कहा,
“हक़ को हक़ मानना और ज़ालिम को ज़ालिम कहना ही कर्बला का वास्तविक संदेश है। हमें अपने अंदर इतनी हिम्मत पैदा करनी होगी कि हम हक़ को हक़ और बातिल को बातिल कह सकें।”
मौलाना साहब ने अपने संबोधन के अंत में हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की मदीने से रुख़सती के दर्दनाक मसायब का विवरण दिया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर रो पड़े। मजलिस के पश्चात रुकसाती इमाम हुसैन (अ.स.) का दृश्य प्रदर्शित किया गया। इसमें बीबियों की महमिले, सफर का सामान, पानी की मश़के, जनाब अली असगर का गहवारा और अन्य तबरुकात शामिल थे।
इस प्रभावशाली प्रस्तुति के बाद ज़ैदपुर की अंजुमन दस्ता ए हैदरी ने अपनी विशिष्ट शैली में नोहा पढ़ा, जिसने उपस्थित लोगों की भावनाओं को और गहराई दी। इसके बाद लखनऊ से आई अंजुमन गुलदस्ता ए हैदरी और बाराबंकी से आई अंजुमन ग़ुनचा ए अब्बासिया ने भी नोहा-ख़्वानी और सिना ज़ानी की, जिससे माहौल अत्यंत श्रद्धापूर्ण और भावनात्मक बन गया। जुलूस ज़ैदपुर के ऐतिहासिक रास्तों से होकर कर्बला पहुँचा। इस दौरान उपस्थित लोगों ने ख़ून का पुर्सा पेश किया और नोहा-ख़्वानी में भाग लेकर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत को याद किया।
अंत में शबीहे ए कर्बला ज़ैदपुर में मौलाना सैयद समर अब्बास रिज़वी साहब ने संक्षिप्त लेकिन अत्यंत मार्मिक मसायब पढ़े, जिसे सुनकर सभी उपस्थित लोग भावविभोर हो गए। इस प्रकार, ज़ैदपुर में 28 रजब का दिन हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में भव्य, श्रद्धापूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ।