ईरान में भारतीय छात्र क्या पढ़ते हैं? हर साल हजारों युवा क्यों चुनते हैं यह देश

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Javed Haider Zaidi

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ईरान की यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते भारतीय छात्र, मेडिकल और इंजीनियरिंग कोर्स के लिए ईरान चुनते युवा, ईरान में भारतीय स्टूडेंट्स की शिक्षा और सुरक्षा स्थिति

ईरान में भारतीय छात्र क्या पढ़ते हैं? ईरान इन दिनों अंतरराष्ट्रीय राजनीति और आंतरिक हालात को लेकर सुर्खियों में है। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर कार्रवाई के बाद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को लेकर दी गई सैन्य चेतावनी ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। वहीं देश के भीतर भी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की नीतियों के खिलाफ युवा वर्ग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहा है। समर्थन और विरोध—दोनों तरह के आंदोलन जारी हैं, जिससे हालात संवेदनशील बने हुए हैं।

इन हालातों के बीच ईरान में रह रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन के मुताबिक, ईरान में मौजूद भारतीय छात्र सुरक्षित हैं और अधिकतर को हॉस्टल या इंडोर रहने की सलाह दी गई है।

हर साल पढ़ाई के लिए ईरान क्यों जाते हैं भारतीय छात्र?

ईरान उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जहां हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र पढ़ाई के लिए जाते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है यहां की उच्च शिक्षा व्यवस्था, खासकर मेडिकल और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में।

ईरान में किन विषयों की होती है सबसे ज्यादा पढ़ाई?

मेडिकल एजुकेशन
ईरान की मेडिकल यूनिवर्सिटीज को मिडिल ईस्ट की बेहतरीन यूनिवर्सिटीज में गिना जाता है। यहां भारतीय छात्र बड़ी संख्या में निम्न कोर्स करते हैं:

  • एमबीबीएस
  • डेंटल (Dentistry)
  • फार्मेसी
  • नर्सिंग
  • अन्य हेल्थ केयर कोर्स

कम फीस और अच्छी क्लिनिकल ट्रेनिंग के कारण मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए ईरान एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है।

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इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी
मेडिकल के अलावा ईरान में इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी काफी लोकप्रिय है। यहां के कॉलेजों में ये कोर्स खास तौर पर पसंद किए जाते हैं:

  • इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग
  • इलेक्ट्रॉनिक्स
  • कंप्यूटर साइंस
  • रोबोटिक्स
  • मैकेनिकल और अन्य टेक्निकल कोर्स

ईरान को पढ़ाई के लिए क्यों चुनते हैं भारतीय छात्र?

ईरान को भारतीय छात्र चुनने के पीछे कई अहम कारण हैं:

  • किफायती फीस: पश्चिमी देशों की तुलना में यहां मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई काफी सस्ती है
  • अनुभवी प्रोफेसर: यूनिवर्सिटीज में पढ़ाने वाले शिक्षक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभवी हैं
  • संस्कृतिक समानता: खान-पान, रहन-सहन और भाषा में काफी हद तक भारतीय संस्कृति से समानता
  • एडजस्टमेंट में आसानी: भारतीय छात्रों को नए माहौल में घुलने-मिलने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती

कितने भारतीय छात्र पढ़ते हैं ईरान में?

आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में करीब 2,000 भारतीय छात्र पढ़ाई के लिए ईरान गए थे। इनमें सबसे ज्यादा संख्या मेडिकल स्टूडेंट्स की रही।

भारत सरकार की नजर

वर्तमान हालात को देखते हुए भारत सरकार लगातार ईरान में मौजूद भारतीय छात्रों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जरूरत पड़ने पर हर संभव मदद देने के संकेत भी दिए गए हैं।

कुल मिलाकर, ईरान भले ही इस समय राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों से गुजर रहा हो, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में वह आज भी भारतीय छात्रों के लिए एक अहम और भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है।

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वॉशिंगटन पोस्ट की बड़ी छंटनी में शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर की नौकरी गई, 12 साल का सफर अचानक थमा

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वॉशिंगटन पोस्ट की छंटनी की खबर के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और वरिष्ठ पत्रकार ईशान थरूर की फाइल फोटो, जो अखबार से 12 साल की सेवा के बाद नौकरी से हटाए गए।

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार वॉशिंगटन पोस्ट में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता जगत को झकझोर कर रख दिया है। इस फैसले की चपेट में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और जाने-माने विदेशी मामलों के पत्रकार ईशान थरूर भी आ गए हैं। करीब 12 वर्षों तक अखबार से जुड़े रहने के बाद ईशान को नौकरी से हटा दिया गया है। उन्होंने खुद सोशल मीडिया के जरिए इस मुश्किल दौर की जानकारी दी और अपने दर्द को शब्दों में साझा किया।

एक तिहाई कर्मचारियों की छंटनी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने कुल कर्मचारियों के लगभग एक तिहाई हिस्से को नौकरी से निकाल दिया है। इस प्रक्रिया में अखबार का खेल विभाग बंद कर दिया गया है, जबकि कई विदेशी कार्यालयों पर भी ताले लग गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि लगभग 800 पत्रकारों की टीम में से 300 से अधिक कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।

ईशान थरूर ने क्या कहा

ईशान थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि आज उन्हें वॉशिंगटन पोस्ट से हटा दिया गया है और उनके साथ अधिकांश अंतरराष्ट्रीय स्टाफ और कई बेहद प्रतिभाशाली सहकर्मियों की भी छुट्टी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने न्यूज रूम और खासतौर पर उन पत्रकारों के लिए गहरा दुख है, जिन्होंने वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग में अखबार की पहचान बनाई।
ईशान ने यह भी कहा कि लगभग 12 वर्षों तक जिन संपादकों और संवाददाताओं के साथ उन्होंने काम किया, वे केवल सहकर्मी नहीं बल्कि दोस्त रहे, और उनके साथ काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही।

‘वर्ल्डव्यू’ कॉलम और पाठकों का साथ

ईशान थरूर ने जनवरी 2017 में वर्ल्डव्यू नाम से कॉलम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य दुनिया की घटनाओं और उसमें अमेरिका की भूमिका को सरल और स्पष्ट तरीके से पाठकों तक पहुंचाना था। उन्होंने बताया कि करीब पांच लाख वफादार पाठकों ने वर्षों तक सप्ताह में कई बार इस कॉलम को पढ़ा, जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे।

वॉशिंगटन पोस्ट में भूमिका

ईशान थरूर वॉशिंगटन पोस्ट में विदेश मामलों के लेखक के तौर पर काम कर रहे थे। भारतीय राजनीति और वैश्विक घटनाओं पर उनकी पकड़ को लेकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद जब भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के दौरे पर था, तब ईशान अपने पिता शशि थरूर से सवाल पूछने को लेकर चर्चा में भी आए थे।

सोशल मीडिया पर समर्थन

ईशान थरूर की छंटनी की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पत्रकारों और पाठकों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई। लोगों ने उन्हें एक बेहतरीन और गंभीर पत्रकार बताया और वॉशिंगटन पोस्ट के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

अखबार प्रबंधन की सफाई

अखबार के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने इस फैसले को “दुखद लेकिन जरूरी” बताया है। उनका कहना है कि बदलती तकनीक, डिजिटल मीडिया के प्रभाव और पाठकों की आदतों में आए बदलावों के अनुरूप खुद को ढालने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था, ताकि अखबार को भविष्य के लिए बेहतर दिशा दी जा सके।

मालिकाना हक और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि वॉशिंगटन पोस्ट के मालिक अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस हैं। उन्होंने साल 2013 में यह अखबार ग्राहम परिवार से करीब 25 करोड़ डॉलर में खरीदा था। तब से अखबार डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन हालिया छंटनी ने पत्रकारिता के भविष्य और मीडिया संस्थानों की स्थिरता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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