निषाद पार्टी (NISHAD Party) के 13वें संकल्प दिवस के अवसर पर मंगलवार को लखनऊ में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की मजबूती और एकजुटता का बड़ा संदेश दिया जाएगा। इस खास आयोजन में भाजपा, अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के कई वरिष्ठ नेता एक मंच पर नजर आएंगे। राजनीतिक दृष्टि से यह कार्यक्रम बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में कुछ ही महीनों में पंचायत चुनाव और इसके बाद वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।
संकल्प दिवस का आयोजन दोपहर तीन बजे से आशियाना स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर सभागार में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ एनडीए के सभी सहयोगी दलों के नेता और पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
केंद्र और प्रदेश सरकार के कई बड़े चेहरे होंगे मौजूद
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह तथा केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की मौजूदगी तय मानी जा रही है। इनके अलावा सुभासपा अध्यक्ष और पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर तथा अपना दल के उपाध्यक्ष एवं प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल भी संकल्प दिवस में शामिल होंगे। सभी नेताओं की उपस्थिति को एनडीए की साझा रणनीति और आपसी तालमेल के रूप में देखा जा रहा है।
2013 से जारी है संकल्प दिवस की परंपरा
निषाद पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद ने वर्ष 2013 में प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर धाम से संकल्प दिवस की शुरुआत की थी। तब से यह दिवस हर साल पार्टी के वैचारिक कार्यक्रम के रूप में मनाया जाता है। इस दिन निषाद समाज के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों को लेकर संकल्प दोहराया जाता है और आगे की रणनीति पर चर्चा होती है।
पिछले साल की कमी, इस बार पूरी करने की कोशिश
पिछले वर्ष संकल्प दिवस का आयोजन दिल्ली में किया गया था, जिसमें अपना दल और सुभासपा के नेता तो शामिल हुए थे, लेकिन भाजपा का कोई बड़ा नेता मंच पर नहीं पहुंच सका था। इस बार इस स्थिति को बदलने की पूरी तैयारी की गई है। बताया जाता है कि संजय निषाद ने स्वयं दिल्ली जाकर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को कार्यक्रम का निमंत्रण दिया था, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री समेत कई नेताओं की सहभागिता तय हुई।
आगामी चुनावों से पहले बड़ा राजनीतिक संकेत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के सभी सहयोगी दलों का एक मंच पर आना कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को यह संदेश देगा कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट और मजबूत है। संकल्प दिवस के मंच से विकास, सामाजिक न्याय और संगठन की मजबूती से जुड़े मुद्दों पर भी नेताओं के संबोधन होने की संभावना है।