Ayushman Card New Rules 2026: e-KYC अब अनिवार्य, जानिए कैसे बदलेंगे मुफ्त इलाज के नियम और कौन होगा पात्र लाभार्थी

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

आयुष्मान कार्ड नियम 2026 के तहत e-KYC अनिवार्य, मुफ्त इलाज की सुविधा के लिए पात्र लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने का दृश्य प्रतिनिधित्व

Ayushman Card New Rules 2026: देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं में से एक आयुष्मान भारत (PM-JAY) के कार्ड धारकों के लिए नए साल के साथ एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू कर दिया गया है। सरकार ने योजना से जुड़े नियमों में संशोधन करते हुए अब आधार-आधारित e-KYC (Electronic Know Your Customer) को अनिवार्य कर दिया है। इस कदम का असर लाखों लाभार्थियों और उनके मुफ्त इलाज की सुविधा पर सीधे पड़ेगा।

आधार e-KYC अब अनिवार्य

नई व्यवस्था के तहत आयुष्मान कार्ड बनवाने और अपडेट करने के लिए अब आधार e-KYC की प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। इसका मतलब यह है कि केवल नाम और मोबाइल नंबर से कार्ड बनाना अब संभव नहीं होगा। लाभार्थियों को अपने आधार की जानकारी सत्यापित करानी होगी।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से योजना के सत्यापित लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित होगी और फर्जी कार्ड बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।

फर्जी कार्डों पर कार्रवाई और इलाज की शर्त

पिछले कुछ समय में योजना से जुड़े कई फर्जी या संदिग्ध कार्डों का पता चला है। अब जो कार्ड e-KYC पूरा नहीं करेंगे, उन पर इलाज की सुविधा में भी रोक लग सकती है।

इसका मतलब है कि मरीजों को अस्पताल में इलाज से पहले अपने कार्ड की सत्यापित स्थिति दिखानी होगी। अगर आधार से लिंक या e-KYC पूरी नहीं है, तो इलाज की सुविधा में असुविधा हो सकती है।

Also Read

परिवार में नए सदस्यों को जोड़ने की प्रक्रिया में बदलाव

पहले आयुष्मान कार्ड में परिवार के नए सदस्यों को जोड़ना अपेक्षाकृत सरल था। नई व्यवस्था के तहत अब यह केवल तभी संभव है जब सभी पात्र सदस्य e-KYC पूरी कर चुके हों। इससे मनमाने नाम जोड़ने की प्रवृत्ति कम होगी और योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयुष्मान भारत योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे। पिछले कुछ वर्षों में योजना से जुड़े फर्जी और संदिग्ध कार्डों के कारण संसाधनों का दुरुपयोग हुआ है।

अब नए नियम लागू होने के बाद योजना के डिजिटल डेटा की गुणवत्ता और सत्यापन प्रक्रिया में सुधार होगा।

लाभार्थियों के लिए सलाह

  • जो लोग पहले से कार्ड धारक हैं, वे जल्द से जल्द अपना e-KYC स्टेटस चेक करें।
  • नए कार्ड बनवाने वाले लाभार्थियों के लिए e-KYC करना अनिवार्य है।
  • आधार से लिंक में कोई गलती या विसंगति होने पर इलाज की सुविधा प्रभावित हो सकती है।
Next Post

राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई पर सस्पेंस: बेल हियरिंग आज, चेक बाउंस केस में ₹9 करोड़ बकाया पर टिकी निगाहें

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव, चेक बाउंस केस में जमानत सुनवाई से पहले रिहाई को लेकर सस्पेंस।

राजपाल यादव: दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) की रिहाई को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। चेक बाउंस मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए राजपाल यादव की जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई होनी है। उनके मैनेजर गोल्डी ने उम्मीद जताई है कि अदालत से राहत मिल सकती है और वह जल्द बाहर आ सकते हैं।

राजपाल यादव का नाम लंबे समय से इस वित्तीय विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसकी जड़ें साल 2010 तक जाती हैं। यह मामला उनकी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के दौरान लिए गए कर्ज से जुड़ा है। फिल्म की असफलता के बाद कर्ज चुकाने में देरी हुई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

इंडस्ट्री का साथ, परिवार की उम्मीद

राजपाल यादव के मैनेजर गोल्डी ने हालिया बातचीत में बताया कि फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सोनू सूद, सलमान खान, अजय देवगन, डेविड धवन, रतन जैन और वरुण धवन जैसे लोग समर्थन जता चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आर्थिक सहायता किस स्तर पर दी जा रही है, लेकिन इतना जरूर कहा कि सभी ने सकारात्मक प्रतिबद्धता जताई है।

गोल्डी के मुताबिक, ऐसे वित्तीय लेन-देन में समय लगता है और परिवार मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाए हुए है। फरवरी के अंत में परिवार में कुछ निजी कार्यक्रम भी निर्धारित हैं और सभी की इच्छा है कि राजपाल यादव तब तक रिहा हो जाएं। उन्होंने यह भी बताया कि बेल हियरिंग तय है और अदालत के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

क्या है पूरा कानूनी मामला?

साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बाद वह समय पर भुगतान नहीं कर सके। इसके बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की।

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि उनके द्वारा जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए थे। अदालत ने उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई।

बढ़ती बकाया राशि और अदालत का रुख

जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए बकाया राशि चुकाने के लिए ठोस प्रयास दिखाने का निर्देश दिया था। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने से बकाया रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक राजपाल यादव ने लगभग 75 लाख रुपये जमा किए थे, लेकिन अदालत ने माना कि कुल बकाया का बड़ा हिस्सा अभी भी बाकी है। फरवरी 2025 में अदालत ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। अतिरिक्त समय मांगने की उनकी अर्जी भी खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

रिहाई कब तक?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजपाल यादव को अदालत से जमानत कब तक मिल सकती है। उनके मैनेजर ने उम्मीद जताई है कि सुनवाई के बाद सकारात्मक फैसला आ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, फिल्म इंडस्ट्री से मिल रहा समर्थन और परिवार की उम्मीदें इस कानूनी संघर्ष के बीच एक मानवीय पक्ष को सामने लाती हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला ही तय करेगा कि राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई कब संभव हो पाएगी।

Next Post

Loading more posts...